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कर्म तुम्हें क्या सिखा रहा है? | Life Lesson of Karma | श्री कृष्ण प्रेरणा

 


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 Original - Scprit

Title :- कर्म तुम्हें क्या सिखा रहा है? | Life Lesson of Karma | श्री कृष्ण प्रेरणा 


श्री कृष्ण कहते हैं पार्थ तुम सोचते हो कि कर्म एक सीधा नियम है। अच्छा करोगे तो अच्छा मिलेगा। बुरा करोगे तो बुरा मिलेगा। पर सत्य इससे कहीं अधिक सूक्ष्म है। कर्म कोई न्यायालय नहीं है जहां सजा और इनाम तय होते हं। कर्म कोई दंड नहीं है। कर्म केवल अनुभूति है। मैं किसी को दंड नहीं देता पार्थ। मैं केवल तुम्हें तुम्हारे ही भाव का अनुभव कराता हूं। तुम जिस भाव से सोचते हो, जिस भाव से बोलते हो, जिस भाव से कर्म करते हो, वही भाव जीवन बनकर तुम्हारे सामने खड़ा हो जाता है। क्रोध से किया गया कर्म संघर्ष बनकर लौटता है। लोभ से किया गया कर्म कभी तृप्ति नहीं देता। भय से लिया गया निर्णय भविष्य में भी भय ही रचता है और प्रेम से किया गया कर्म जीवन को भी प्रेम सिखा देता है। पार्थ तुम पूछते हो भगवान मैंने तो किसी का बुरा नहीं किया फिर मेरे साथ ऐसा क्यों? पर याद रखो कर्म केवल इस जन्म के नहीं होते। कर्म स्मृति की तरह होते हैं। जो तुम भूल जाते हो वह भी तुम्हारे भीतर छाप बनकर जीवित रहता है। जीवन एक पुस्तक है पार्थ और जन्म उसके अध्याय। जब तुम यह समझ जाओगे तब यह प्रश्न समाप्त हो जाएगा मेरे साथ ही क्यों? कर्म तीन प्रकार के होते हैं। पहला संचित कर्म। वे सभी कर्म जो अनेक जन्मों में किए गए अच्छे भी बुरे भी जो ऊर्जा बनकर तुम्हारे भीतर संचित हैं। दूसरा प्रारब्ध कर्म वे कर्म जो इस जीवन में तुम अनुभव कर रहे हो। यह वही संचित कर्म है जो अब फलित हो रहे हैं। और तीसरा क्रियामाण कर्म जो तुम अभी सोच रहे हो, बोल रहे हो, कर रहे हो। पार्थ इन तीनों में से सिर्फ एक तुम्हारे हाथ में है। वर्तमान का कर्म। कर्म बदलना किस्मत बदलना नहीं है। कर्म बदलना स्वयं को बदलना है। और याद रखो तीन बातें तुरंत कर्म की दिशा बदल देती हैं। पहली तुम्हारा इरादा। इरादा शुद्ध हो तो कर्म पूजा बन जाता है। दूसरी तुम्हारा भाव। प्रेम से किया गया कर्म बंधन नहीं बनाता। तीसरी तुम्हारा चयन। आज लिया गया निर्णय कल की दिशा तय करता है। कर्म तभी भारी लगता है जब तुम उसे अपने अहंकार से जोड़ लेते हो और कर्म तभी हल्का हो जाता है जब तुम उसे मुझे सौंप देते हो। मैंने कहा था पार्थ कर्म करो फल की चिंता मत करो क्योंकि चिंता कर्म का भार बढ़ा देती है। जब तुम कर्म को पूजा समझकर करने लगते हो और फल को मेरे चरणों में अर्पित कर देते हो तब कर्म तुम्हें बांध नहीं पाता तब कर्म तुम्हारी मुक्ति बन जाता है। कर्म तुम्हें तोड़ने नहीं आता। कर्म तुम्हें जगाने आता है। कर्म दर्द नहीं है पार्थ। कर्म एक दर्पण है जो तुम्हें तुम्हारे ही सत्य से मिलाता है। अब अतीत को छोड़ो। इस क्षण को बदलो। एक नया कर्म आरंभ करो क्योंकि एक शुद्ध कर्म हजार पुराने कर्मों को शांत कर सकता है। मैं तुम्हारे साथ हूं पार्थ हर उस कर्म में जो सत्य, प्रेम और जागरूकता से किया जाता है। अगर इस ज्ञान ने तुम्हारे मन को थोड़ी भी शांति दी हो तो इसे यहीं मत रोकना। इस वीडियो को लाइक करो। जिसे आवश्यकता है उसे शेयर करो। अपने मन की बात कमेंट में लिखो और जीवन के और गहरे सत्य

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